Best Short Stories in Hindi for Kids | बच्चों की कहानियां | Baccho kikahaniya


Best Short Stories in Hindi for Kids
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Short Stories in Hindi for Kids



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बच्चों की कहानियां-Baccho ki kahaniya



दूसरों से सीखो(Learn from others)
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यूनान के महान दार्शनिक प्लेटो से दूर – दूर के लोग कुछ सीखने आते थे | पर वे बताने के साथ साथ उन आये हुए लोगो से कुछ न कुछ पूछते रहते | एक बार उनके एक शिष्य ने प्लेटो से पूछा ” गुरूजी क्या आपको नहीं लगता की अगर ऐसे आने वाले वालो से कुछ न कुछ पूछने पर उन्हें लगेगा की आपको बहुत कुछ तो आता ही नहीं है , इसलिए आप उनसे पूछ रहे हैं | और इस तरह आपकी इज़्ज़त काम हो जाएगी |
प्लेटो ने बड़ी नम्रता से जवाव दिया ” यह ब्रह्माण्ड बहुत व्यापक है , यहाँ बहुत सी चीज़े है जो हम एक जीवन में अपने अनुभव से नहीं सीख सकते | इसलिए हमें दूसरो के अनुभव से भी सीखना चाहिए |
इस तरह हम कम समय में अपने ज्ञान को बढ़ा लेंगे .
मैं पूरी ज़िन्दगी अपने को विद्यार्थी ही मानूँगा | और यही पदवी मुझे सबसे बड़ी लगती है |
अच्छे संस्कार डालने के लिए मेहनत करनी पड़ती है, ये अनायास आपको नहीं मिल जाते |
जिस व्यक्ति ने सीखना छोड़ दिया समझो उसने जीवन का आनंद लेना भी छोड़ दिया |



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बच्चों की कहानियां-Baccho ki kahaniya



            ईमानदारी सर्वोत्तम नीति है(Honesty is the best policy)


स्विट्ज़रलैंड की बात है एक १२ साल का गरीब लड़का था | एक दिन वह लड़का सड़क पर गेंद उछाल रहा था | वह गेंद एक दुकान के शीसे में जाकर लगी और शीश टूट गया | भागने का अवसर था पर वह लड़का भगा नहीं | दूकानदार ने उस लड़के को पकड़ लिया उससे पैसे मांगे | लड़के पास रूपये थे ही नहीं तो ये तय हुआ की ४ दिन लड़का दुकान की साफ़ सफाई का काम करेगा |
लड़का इस बात को मन गया और उसने चार दिन दुकान पर काम किया | उसने अपना काम बहुत ईमानदारी से किया कि दुकान का मालिक उस लड़के के काम और ईमानदारी से खुश हो गया और उसे अपने यहाँ नौकरी दे दी | वह लड़का पढता भी रहा साथ साथ नौकरी भी करता रहा | धीरे धीरे उसने अपने सद्गुणों से मालिक का मन मोह लिया |
कुछ साल बाद मालिक ने उसे अपने कारोबार में पार्टनर बना लिया | और धीरे धीरे तरक्की करते करते उसकी गिनती अमीर व्यक्तियों में होने लगी |
वह लड़का अपनी कामयाबी का सारा श्रेय अपनी माँ को देता और कहता मेरी माँ ने ही मुझे अपनी गलती स्वीयकार करने और पूरी ईमानदारी से काम करनें की शिक्षा दी |
दोस्तों बचपन में मिली हुई शिक्षा पुरे जीवन हमारे साथ चलती है, इसलिए कोशिश करके अपने बच्चो को नैतिक शिक्षा ज़रूर दे इसी से उनके जीवन का और समाज का कल्याण होगा |
सिर्फ पैसे कमाने तक की शिक्षा आपके बच्चो को अमीर आदमी तो बना सकती है पर वह जीवन में खुश तभी होंगे जब वह सच्चाई के रास्ते पर चलेंगे |

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बच्चों की कहानियां-Baccho ki kahaniya



बुद्धिमान साधु


किसी राजमहल के द्वारा पर एक साधु आया और द्वारपाल से बोला कि भीतर जाकर राजा से कहे कि उनका भाई आया है।

द्वारपाल ने समझा कि शायद ये कोई दूर के रिश्ते में राजा का भाई हो जो संन्यास लेकर साधुओं की तरह रह रहा हो!

सूचना मिलने पर राजा मुस्कुराया और साधु को भीतर बुलाकर अपने पास बैठा लिया।

साधु ने पूछा – कहो अनुज*, क्या हाल-चाल हैं तुम्हारे?

“मैं ठीक हूँ आप कैसे हैं भैया?”, राजा बोला।

साधु ने कहा- जिस महल में मैं रहता था, वह पुराना और जर्जर हो गया है। कभी भी टूटकर गिर सकता है। मेरे 32 नौकर थे वे भी एक-एक करके चले गए। पाँचों रानियाँ भी वृद्ध हो गयीं और अब उनसे को काम नहीं होता…

यह सुनकर राजा ने साधु को 10 सोने के सिक्के देने का आदेश दिया।

साधु ने 10 सोने के सिक्के कम बताए।

तब राजा ने कहा, इस बार राज्य में सूखा पड़ा है, आप इतने से ही संतोष कर लें।

साधु बोला- मेरे साथ सात समुन्दर पार चलो वहां सोने की खदाने हैं। मेरे पैर पड़ते ही समुद्र सूख जाएगा… मेरे पैरों की शक्ति तो आप देख ही चुके हैं।

अब राजा ने साधु को 100 सोने के सिक्के देने का आदेश दिया।

साधु के जाने के बाद मंत्रियों ने आश्चर्य से पूछा, “ क्षमा करियेगा राजन, लकिन जहाँ तक हम जानते हैं आपका कोई बड़ा भाई नहीं है, फिर आपने इस ठग को इतना इनाम क्यों दिया?”

राजन ने समझाया, “ देखो, भाग्य के दो पहलु होते हैं। राजा और रंक। इस नाते उसने मुझे भाई कहा।

जर्जर महल से उसका आशय उसके बूढ़े शरीर से था… 32 नौकर उसके दांत थे और 5 वृद्ध रानियाँ, उसकी 5 इन्द्रियां हैं।

समुद्र के बहाने उसने मुझे उलाहना दिया कि राजमहल में उसके पैर रखते ही मेरा राजकोष सूख गया…क्योंकि मैं उसे मात्र दस सिक्के दे रहा था जबकि मेरी हैसियत उसे सोने से तौल देने की है। इसीलिए उसकी बुद्धिमानी से प्रसन्न होकर मैंने उसे सौ सिक्के दिए और कल से मैं उसे अपना सलाहकार नियुक्त करूँगा।

बच्चों इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है कि किसी व्यक्ति के बाहरी रंग रूप से उसकी बुद्धिमत्ता का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता इसलिए हमें सिर्फ इसलिए कि किसी ने खराब कपडे पहने हैं या वो देखने में अच्छा नहीं है; उसके बारे में गलत विचार नहीं बनाने चाहियें।

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बच्चों की कहानियां-Baccho ki kahaniya



बाज की सीख-बच्चों की कहानियां


एक बार एक शिकारी जंगल में शिकार करने के लिए गया। बहुत प्रयास करने के बाद उसने जाल में एक बाज पकड़ लिया।

शिकारी जब बाज को लेकर जाने लगा तब रास्ते में बाज ने शिकारी से कहा, “तुम मुझे लेकर क्यों जा रहे हो?”

शिकारी बोला, “ मैं तुम्हे मारकर खाने के लिए ले जा रहा हूँ।”

बाज ने सोचा कि अब तो मेरी मृत्यु निश्चित है। वह कुछ देर यूँ ही शांत रहा और फिर कुछ सोचकर बोला, “देखो, मुझे जितना जीवन जीना था मैंने जी लिया और अब मेरा मरना निश्चित है, लेकिन मरने से पहले मेरी एक आखिरी इच्छा है।”

“बताओ अपनी इच्छा?”, शिकारी ने उत्सुकता से पूछा।

बाज ने बताना शुरू किया-

मरने से पहले मैं तुम्हें दो सीख देना चाहता हूँ, इसे तुम ध्यान से सुनना और सदा याद रखना।

पहली सीख तो यह कि किसी कि बातों का बिना प्रमाण, बिना सोचे-समझे विश्वास मत करना।

और दूसरी ये कि यदि तुम्हारे साथ कुछ बुरा हो या तुम्हारे हाथ से कुछ छूट जाए तो उसके लिए कभी दुखी मत होना।

शिकारी ने बाज की बात सुनी और अपने रस्ते आगे बढ़ने लगा।

कुछ समय बाद बाज ने शिकारी से कहा- “ शिकारी, एक बात बताओ…अगर मैं तुम्हे कुछ ऐसा दे दूँ जिससे तुम रातों-रात अमीर बन जाओ तो क्या तुम मुझे आज़ाद कर दोगे?”

शिकारी फ़ौरन रुका और बोला, “ क्या है वो चीज, जल्दी बताओ?”

बाज बोला, “ दरअसल, बहुत पहले मुझे राजमहल के करीब एक हीरा मिला था, जिसे उठा कर मैंने एक गुप्त स्थान पर रख दिया था। अगर आज मैं मर जाऊँगा तो वो हीरा ही बेकार चला जाएगा, इसलिए मैंने सोचा कि अगर तुम उसके बदले मुझे छोड़ दो तो मेरी जान भी बच जायेगी और तुम्हारी गरीबी भी हमेशा के लिए मिट जायेगी।”

यह सुनते ही शिकारी ने बिना कुछ सोचे समझे बाज को आजाद कर दिया और वो हीरा लाने को कहा।

बाज तुरंत उड़ कर पेड़ की एक ऊँची साखा पर जा बैठा और बोला, “ कुछ देर पहले ही मैंने तुम्हे एक सीख दी थी कि किसी के भी बातों का तुरंत विश्वास मत करना लेकिन तुमने उस सीख का पालन नही किया…दरअसल, मेरे पास कोई हीरा नहीं है और अब मैं आज़ाद हूँ।

यह सुनते ही शिकारी मायूस हो पछताने लगा…तभी बाज फिर बोला, तुम मेरी दूसरी सीख भूल गए कि अगर कुछ तुम्हारे साथ कुछ बुरा हो तो उसके लिए तुम कभी पछतावा मत करना।

बच्चों इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है कि हमे किसी अनजान व्यक्ति पर आसानी से विश्वास नहीं करना चाहिए और किसी प्रकार का नुक्सान होने या असफलता मिलने पर दुखी नहीं होना चाहिए, बल्कि उस बात से सीख लेकर भविष्य में सतर्क रहना चाहिए।

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हाथी क्यों हारा


एक बार एक व्यक्ति, एक हाथी को रस्सी से बांध कर ले जा रहा था | एक दूसरा व्यक्ति इसे देख रहा था | उसे बढ़ा आश्चर्य हुआ की इतना बढ़ जानवर इस हलकी से रस्सी से बंधा जा रहा है दूसरे व्यक्ति ने हाथी के मालिक से पूछा ” यह कैसे संभव है की इतना बढ़ा जानवर एक हलकी सी रस्सी को नहीं तोड़ पा रहा और तुम्हरे पीछे पीछे चल रहा है|

हाथी के मालिक ने बताया जब ये हाथी छोटे होते हैं तो इन्हें रस्सी से बांध दिया जाता है उस समय यह कोशिश करते है रस्सी तोड़ने की पर उसे तोड़ नहीं पाते | बार बार कोशिश करने पर भी यह उस रस्सी को नहीं तोड़ पाते तो हाथी सोच लेते है की वह इस रस्सी को नही तोड़ सकते और बढे होने पर कोशिश करना ही छोड़ देते है .
Moral of The Story – दोस्तों हम भी ऐसी बहुत सी नकारात्मक बातें अपने दिमाग में बैठा लेते हैं की हम नहीं कर सकते | और एक ऐसी ही रस्सी से अपने को बांध लेते हैं जो सच में होती ही नहीं है |

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गरीब से साहित्यकार बनें


बात 1890 के आस पास की है | एक गांव में एक लड़का रहता था | उसके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी | उसके मन में विचार आया किसी बड़े शहर में जाकर नौकरी करे | वह कलकत्ता गया और नौकरी ढूंढने लगा | बहुत खोज के बाद उसे एक सेठ के घर नौकरी मिल गयी | नौकरी छेह अने रोज़ की थी | काम था सेठ को रोज़ ४ घंटे अख़बार और किताब पढ़कर सुनाना | लड़के को नौकरी की ज़रूरत थी तो उसने वह नौकरी स्वीकार कर ली |
एक दिन की बात है लड़के को दुकान के कोने में 100-100 के 8 नोट पड़े मिले | उसने चुपचाप उन्हें अख़बार और किताबो से ढक दिया | दूसरे दिन रुपयों की खोजबीन हुई | लड़का सुबह जब दुकान पर आया तो उससे पूछा गया | लड़के ने तुरंत ही प्रसनन्ता से रूपये निकालकर ग्राहक को दे दिए | वह बहुत ही खुश हुआ | लड़के के ईमानदारी से सबको बहुत प्रसनन्ता हुई |
सेठ भी लड़के से बहुत खुश हुआ | सेठ ने लड़के को पुरस्कार देना चाहा तो लड़के ने लेने से मना कर दिया | लड़के ने कहा सेठ जी में आगे पढ़ना चाहता हु | पर पैसो के आभाव ने पढ़ नहीं पा रहा | आप कुछ सहयता कर दें |
सेठ ने लड़के की पढ़ाई का प्रवन्ध कर दिया | लड़का बहुत मेहनत से पढता गया | यही लड़का आगे चलकर बहुत बढ़ा सहित्यकार बना | इसका नाम था – राम नरेश त्रिपाठी . हिंदी साहित्य में इनका बहुत बढ़ा योगदान है |

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सारे रिश्ते टूट गए


एक बार एक बहुत सुन्दर लड़की थी | वह इतनी सुन्दर थी जो भी उसे देखता , देखता ही रह जाता | पर उसे गुस्सा बहुत आता था | गुस्से में वह किसी से कुछ भी कह देती | घर के सब लोग उसकी इस आदत से बहुत परेशान थे | एक बार उसके पिता ने उसे सबक सिखाने की सोचा | उसके पिता ने उसे कुछ कील और हथौड़ा दिया और कहा एक महीने तक हम एक एक्टिविटी करेंगे जिसमे तुम्हे बस एक महीने तक गुस्सा कम करना है उसके बाद तुम चाहो जितना गुस्सा कर सकती हो | और जब भी तुम्हे गुस्सा आये और तुम किसी से बुरी तरह बोल दो तो एक कील दीवार में लगा देना | और कोशिश करनी है गुस्सा कम करने की , लड़की तैयार हो गयी | उसे जब भी गुस्सा आता और वह किसी को कुछ बोल देती तो एक कील दिवार में लगा देती | पहले दिन उसने दीवार में ३० कील लगा दी | पर धीरे धीरे दिवार में लगने वाली कील काम होने लगी | १५ ही दिन में उस लड़की ने सबसे बुरी तरह बोलना काम कर दिया | अब उसके पिता ने उससे कहा की अगर तुम एक बार भी गुस्सा होने पर किसी से बुरी तरह न बोलो तो अपने द्वारा लगायी हुई कील में से एक कील निकाल देना | लड़की ने वैसे ही किया | १ महीने के अंत तक दीवार से सब कील निकल गयी | लड़की बहुत खुश हुई की वो इस गेम में जीत गयी | और अपने पिता जी से कहने लगी देखिये सब कील दीवार से निकल गयी |
उसके पिता ने कहा दीवार से कील तो निकल गयी पर क्या दीवार पहले जैसी सुन्दर दिख रही है | दीवार में जगह जगह निशान पढ़ गए हैं |
पिता ने अपनी बेटी को समझाया इसी तरह जब तुम किसी पर गुस्सा करती हो तो तुम्हारे रिश्तो में भी ख़राब निशान छूट ही जाते है | और एक दिन यही निशान रिश्तों को भी ख़राब कर देते हैं लड़की के बात समझ में आ गयी और उसने उस दिन से गुस्सा करना बहुत कम कर दिया .
Moral of the Story

दोस्तों सब सभी का भी यही हाल होता है | हम जिस पर गुस्सा कर सकते है उससे बहुत उल्टा सीधा कह देते हैं और अपने रिश्तो को ख़राब कर देते हैं | गुस्सा करने की हम आदत बना लेते है और जिसे हम दबा सकते है उसी पर गुस्सा करते हैं | जैसे की ऑफिस में बॉस ने कुछ कह दिया हम उससे कुछ नहीं कह सकते तो घर आकर बच्चो को बिना किसी गलती के ही डांट देते हैं |
इसलिए अपनी इस ख़राब आदत को रिश्तो के ख़राब होने से पहले ही सुधार लीजिये |

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नफ़रत एक बुराई


बच्चों की कहानियां Baccho ki kahaniya एक बार की बात है एक क्लास में टीचर ने बच्चों के एक गेम खेलने को कहा | उस गेम को खेलने के लिए बच्चों को एक प्लास्टिक का बैग और आलू लाने थे | टीचर ने बच्चों से कहा कि तुम क्लास में जिस भी बच्चे से नफरत करते हो उतने आलू बैग में डाल दो | किसी बच्चे ने 2 किसी ने 3 किसी ने 5 आलू बैग में डाल लिए | अब टीचर ने कहा इस बैग को अपने घर पर अपने रूम में रख लेना और 7 दिन बाद इस बैग को ले आना | बच्चों ने ऐसा ही किया . जब बच्चे 7 दिन बाद बैग लेकर आये तो सारे रूम में बदबू आने लगी | जिसके बैग में ज़्यदा आलू थे उसका बैग ज़्यादा भरी हो गया था और उसके पास से ज़्यादा बदबू आ रही थी |

Moral of the Story
तब टीचर ने बताया जैसे की इन आलू के बैग में से बदबू आने लगी उसी तरह हमारे जीवन में जब हम किसी से नफरत करते है तो बुराइयों रुपी बदबू आने लगती है | तो उसका भुगतान हमें ही करना पढता है | हम जीवन में उतने खुश नहीं हो पाते जितने हम हो सकते है और अपने आप पर ही ज़्यदा बोझ डाल लेते है |
जैसे ही हम लोगो को माफ़ कर देते हैं हमारा जीवन खुशियों से भर जाता है |

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चिड़िया की परेशानी


एक चिड़िया थी वह बहुत ऊंचा उड़ती , इधर उधर चहचहाती रहती | कभी इस टहनी पर कभी उस टहनी पर फुदकती रहती |पर उस चिड़िया की एक आदत थी वह जो भी दिन में उसके साथ होता अच्छा या बुरा उतने पत्थर अपने पास पोटली में रख लेती और अकसर उन पत्थरो को पोटली से निकाल कर देखती अच्छे पत्थरो को देखकर बीते दिनों में हुई अच्छी बातो को याद करके खुश होती | और खराब पत्थरो को देखकर दुखी होती |ऐसा रोज़ करती | रोज़ पत्थर इकठा करने से उसकी पोटली दिन प्रतिदिन भारी होती जा रही थी | थोड़े दिन बाद उसे भरी पोटली के साथ उड़ने में दिक्कत होने लगी | पर उसे समझ नहीं आ रहा था की वह उठ क्यों नहीं पा रही |
कुछ समय और बीता, पोटली और भारी होती जा रही थी | अब तो उसका जमीन पर चलना भी मुश्किल हो रहा था | और एक दिन ऐसा आया की वह खाने पीने का इंतज़ाम भी नहीं कर पाती अपने लिए और अपने पत्थरो के बोझ तले मर गयी .

Moral Of the Story –
दोस्तों ऐसा ही हमारे साथ होता है जब हम पुरानी बातो की पोटली अपने साथ रखते है | अपने वर्तमान का आनंद लेने की जगह भूतकाल की बातो को ही सोचने में लगे रहते हैं | इस पल का आन्नद लीजिये |

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Motivational Story


एक टिटहरी(San dipper) थी | उसके अंडे एक बार समुद्र बहा कर ले गया | टिटहरी को बहुत दुःख हुआ | उसने सोचा की में समुद्र में से अपने अंडे ज़रूर निकल कर लाऊंगी | ऐसा सोचकर टिटहरी अपनी चोंच में मिटटी भरती और समुद्र में डाल देती | उसके इस कार्य को महर्षि अगस्त्य देख रहे थे उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ | महर्षि ने टिटहरी से इसका कारण पूछा | टिटहरी ने बताया – ” महाराज मेरे अंडे समुद्र बहा कर ले गया है अब में इस समुद्र को मिटटी से भर दूंगी और अपने अंडे निकल लाऊंगी | ”
महर्षि को इस छोटे से पक्षी के प्रयास को देखकर बहुत प्रसन्नता हुई और उन्होंने उसकी सहायता करने का निर्णय लिया . महर्षि अगस्त्य ने 3 अंजली में सारे समुद्र का पानी पी लिया और टिटहरी के अंडे मिल गए |

Moral of the Story

जब हम किसी काम को करने में पूरे मन से लग जाते हैं तो सारी कायनात हमारी सहायता करने में लग जाती है |
चाहे आप कितनी भी बड़ी मुश्किल में फँस गए हो लेकिन कभी अपने आप पर से विश्वास न खोना, कभी हार न मानना और अपनी आखिरी साँस तक लड़ते रहना फिर किसी मुश्किलों में इतनी ताकत नहीं है की वो आपको ज्यादा देर तक परेशान कर सके ।
कभी भी परेशानियों के आगे मत झुको हमेशा आगे बढ़ने का प्रयास करो ज़िंदगी वो नहीं जो हमें मिली है ज़िंदगी वो है जो हम इसे बनाते हैं | किसी भी सफल व्यक्ति के जीवन से देखे चाहे वो अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) हो या धीरु भाई अम्बानी (Dhirubhai Ambani ) या बिल गेट्स (Bill Gates) हो या स्टीव जॉब्स (Steve Jobs ). हर किसी के जीवन में परेशानियां आई पर वो सफल इसलिए हुए क्योकि उन्होंने परेशानियों के आगे घुटने नहीं टेके और आगे बढ़ने के रस्ते निकल लिए | किसी ने कहा भी है जिनके जीवन में कोई परेशानी नहीं आती वो जीवन में कोई उन्नति भी नहीं कर सकते |(Best Short Stories in Hindi for Kids)

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