एक ख़ुशहाल जीवन कैसे जियें??


ख़ुशहाल जीवन कैसे जियें

जीवन में खुशियाँ क्यों नहीं हैं? अपनें जीवन को हम बेहतर कैसे बना सकतें हैं? या एक ख़ुशहाल जीवन हम कैसे जी सकतें हैं?


ऐसे अनगिनत-अनसुलझे सवाल हम सभी को घेरे हुयें हैं| और ऐसे ही सवालों का बोझ इतना ज़्यादा है कि किसी के भी दिल का दिवाला निकल जाये!!

लेकिन इसका मतलब, ये बिलकुल नहीं है कि ऐसे सवालों का ज़वाब नहीं है!

दरअसल पूरी दुनिया में ऐसा कोई सवाल नहीं है जिसका ज़वाब ना हो, अंतर बस इतना होता है कि हम अनजान होतें हैं, ऐसे पहलुओं से, जिनकी मदद से हम उन सवालों के जवाब तक पहुँच सकतें हैं|

अब सवाल ये उठता है कि आखिर जीवन के इन सवालों का ज़वाब हम किन पहलुओं की मदद से ढूंढ सकतें हैं?

इसका बहुत ही आसान सा ज़वाब हमारे भीतर ही छुपा है!!

मानव जीवन अपनें आप में खुला रहस्य है| इसी वज़ह से हमारी हालत भी “कस्तूरी मृग” जैसी है|

अब मुझे पता है आप में से बहुत लोगों का दिमाग “कस्तूरी मृग” पर लटका रह गया होगा?? है ना !!

अगर आप इसके बारें में जानतें हैं तो अच्छी बात है अगर नहीं जानतें तो मैं ही आपको बता देता हूँ कि आखिर “कस्तूरी मृग” की कहानी क्या है?

दरअसल कस्तूरी एक सुगन्धित पदार्थ होता है| जिसकी ख़ुशबू किसी का भी मन मोह ले| इसी ख़ुशबू की ख़ोज में वो “कस्तूरी मृग” पूरे जंगल में भटकता रहता है|

परन्तु वो कस्तूरी पदार्थ उस मृग की नाभि में ही पाया जाता है तो भला वो जंगल में कहाँ से मिल जायेगा ??!!

इसी वज़ह से उसका नाम भी “कस्तूरी मृग” रखा गया|

बिलकुल यही स्थिति आज के मनुष्य की भी है|

वो तमाम तरह की समस्याओं, चिंताओं से ग्रसित होकर इधर-उधर समस्त संसार में भटकता रहता है कि कहीं इन सभी समस्याओं का समाधान मिले, कही थोड़ी सी ख़ुशी मिल जाये वस्तुतः सही ये है कि इन सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान उसके जीवन मूल्यों में ही निहित है कमी है तो बस जागरूकता की|

जिसकी वज़ह से वो ख़ुद से पूरी तरह अनजान रहता है और इन्हीं चिंताओं के साथ वो इस संसार से विदा लेता है|

लेकिन अगर आप अपनें जीवन को अच्छी तरह से जीना चाहतें हैं तो आपको सबसे पहले ख़ुद को जानना बहुत ज़रूरी है|

अगर आपनें ख़ुद को जान लिया तो ये आपके जीवन की सबसे बड़ी जीत होगी और फिर कोई भी समस्या, कोई भी चिंता आपके जीवन रुपी रंग को धूमिल नहीं कर पायेगी|

तो आज हम आपसे इसी बारें में बात करनें वालें हैं कि अपनें जीवन को हमे किस तरह से जीना चाहिए?-
ख़ुशहाल जीवन कैसे जियें


ख़ुद को पहचानें


हाँ!! 
अपनें जीवन को अच्छे से जीनें की पहली शर्त यही है कि आप ख़ुद को पहचानें|

ख़ुद को पहचाननें की प्रक्रिया में आपको ये देखना चाहिए कि आपकी ख़ासियत क्या है? या आपको क्या करना अच्छा लगता है? क्या खाना अच्छा लगता है? क्या पहनना अच्छा लगता है?

इन सब चीजों को अगर आप निश्चित रूप से जानतें हैं तो फिर आपकी जिंदगी बहुत ही हसीन होनें वाली है|

फिर जो काम आपको पसंद नहीं है उस काम को बिलकुल भी ना करें इससे आप आगे आने वाली तमाम परेशानियों से बच पाएंगे और चिंतामुक्त रहेंगें|


अच्छा इसके पीछे कारण साफ़ है जब आप अपनी पसंद का कोई कार्य 

करेंगें तो आप हमेशा निश्चिंत और ऊर्जावान रहेंगे इसमें कोई संदेह नहीं| 

ख़ुशहाल जीवन कैसे जियें



वर्तमान को जी भर जियें 


हमारा जीवन अतीत की परछाइयों और भविष्य की आशाओं के बीच पिसता रहता है या यूँ कहें हम ख़ुद ही उसे भूत-भविष्य के चक्कर में बर्बाद करतें रहतें हैं|

मैं ये नहीं कहता कि आप अपनी अतीत की यादों में ना खोएं या भविष्य के लिए कोई योजनायें न बनायें, बल्कि मैं ये कहना चाहता हूँ पहले आप वर्तमान का आनंद लें|

बाक़ी सभी कार्यों का एक निश्चित समय होता है और वो कार्य अपनें समय पर करना सही है लेकिन वर्तमान की कीमत पर नहीं!

आपनें अक्सर देखा होगा जब लोग किसी से पूछ्तें हैं कि क्या हाल चाल है?? तो अधिकतर आप सुनतें होंगे – बस जिंदगी कट रही है??!!

मेरी आज तक ये समझ में नहीं आया कि आखिर जिंदगी लोग क्यों काट रहें हैं? एक उज्जवल भविष्य की कल्पनाओं के लिए या इंतज़ार कर रहें हैं कि ज़ल्द ही मृत्यु आकर उनको अपनें साथ ले जानें आएगी|

अगर पहला कारण सही है तो फिर उनके वर्तमान का क्या? क्या जो समय गुज़र रहा है क्या वो लौट के वापस आएगा? नहीं ना!!

और दूसरा कारण हो नहीं सकता क्योंकि मरना किसी को भी पसंद नहीं होता ....!!

इसीलिए हमें चाहिए चाहे जैसी भी परिस्थिति हो हर हाल में हमें उसका

आनंद लेना चाहिए क्या पता वही आपके जीवन का स्वर्णिम पल हो या हो

सकता है फिर वो पल आपकी जिंदगी में दोबारा ना आये|

चिंता करनें से बचें 


जैसा कि हम सभी जानतें हैं एक स्वस्थ्य शरीर ही सुंदर मन का आधार है और एक चिंता से ग्रसित व्यक्ति कभी पूर्ण रूपेण स्वस्थ्य नहीं कहा जा सकता|

दूसरा चिंता से ग्रसित व्यक्ति अपनें जीवन में कभी भी सही निर्णय नहीं ले सकता|

इसीलिए महापुरुषों नें कहा भी है जब चिंता हो तो चिंतन करना चाहिए तभी आप चिंता से दूर हो पायेंगें|

चिंतन, चिंता से बचनें की सबसे बढ़िया दवा है| चिंतन में कुछ चरण होतें हैं जिनको मैं बहुत ही संक्षिप्त रूप से आपको बता देता हूँ-

वैसे तो चिंतन का अध्यात्म से बहुत ही गहरा सम्बन्ध है और इसकी कई जटिल विधियाँ भी हैं परन्तु इसकी सबसे सरल विधि यही है कि सबसे पहले हमें अपनें चित्त को शांत करते हुए चिंता के कारणों को समझना चाहिए, फिर उसके निवारण का उपाय ढूंढना चाहिए| 

अधिकतर तो ऐसा ही होता है कि जो समस्या का कारण होता है उस समस्या का निवारण भी उसी में कही छुपा होता है|

कई बार किसी के कुछ टिप्पणी कर देनें पर भी हम चिंतित हो जातें हैं| अगर किसी की टिप्पणी आपमें कुछ अच्छा सुधार लाती है तो उसे सहर्ष स्वीकार करना चाहिए|

परन्तु अधिकतर नकारात्मक टिप्पणियाँ ईर्ष्या भावना से प्रेरित होतीं हैं 

ऐसी टिप्पणियों पर हमें ध्यान देनें की कोई आवश्यकता नहीं होती वरन ऐसे

लोगों से भी हमें दूर रहना चाहिए|
ख़ुशहाल जीवन कैसे जियें



हर हाल में ख़ुश रहें 


ये एक सुखी एवं ख़ुशहाल जीवन का मूलमंत्र है| जिसको हमेशा अपनी गाँठ में बांधकर रखना चाहिए|

कई बार हम ख़ुद को या अपनी किस्मत को दोष देते रहतें हैं| ख़ासकर जब कोई काम हमारे मन मुताबिक नहीं होता| और हमें लगता है ईश्वर नें सबसे ज़्यादा अन्याय हमारे साथ ही किया है| लेकिन असलियत में कहानी कुछ और होती है|

हमारा जीवन संघर्ष की अनवरत गाथा है|

क्योंकि अगर संघर्ष नहीं होगा, कोई दुःख नहीं होगा, तो हमारे जीवन का कोई अर्थ ही नहीं होगा हमारा जीवन नीरस हो जायेगा|

आप इसको ऐसे समझ सकतें हैं अगर आपसे कहा जाए कि एक क्षण के लिए आपके सारे दुख मिटा दिए जाएँ आप जो पाना चाहतें हैं वो बिना कुछ किये मिल जाये|

ये सोंचनें में तो अच्छा लगता है लेकिन दीर्घकालीन परिणामों के लिए ये घातक सिद्ध होगा|

फिर आपके पास कोई काम नही होगा, कोई उद्देश्य नही होगा, जिंदगी शुरू से आखिर तक एक जैसी होगी|

और फिर आप इस जीवन के मर्म से भटक जायेंगें, आपके लिए सुख का कोई मोल नहीं रह जायेगा|

बस इसीलिए संघर्ष की, दुखों की, अपनी महत्ता है हमारे जीवन में क्योंकि ये हमारे सुखों के वास्तविक आनंद का कारण बनतें हैं|

इसीलिए हम जैसे सुख में ख़ुश रहें, वैसे हमें विपरीत परिस्थितियों यानि दुःख के समय भी ख़ुश रहना चाहिए|
ख़ुशहाल जीवन कैसे जियें

सकारात्मकता से परिपूर्ण रहें 

इस संसार में हार-जीत हर किसी के जीवन का एक हिस्सा है| बस तरीका अलग होता है उस हार जीत का|

इसी हार जीत में हमारा जीवन दिन-प्रतिदिन आगे बढ़ता रहता है|

इस संसार में लोग भी कई प्रकार के होतें हैं कुछ ऐसे होतें है जिनको थोड़ी मेहनत में सफलता मिल जाती है लेकिन उसका फल उनकी मेहनत पर निर्भर करता है|

कुछ ऐसे होतें हैं जो एक बार हारतें हैं तो फिर दोबारा उनकी हिम्मत ज़वाब दे जाती है|

परन्तु कुछ लोग ऐसे होतें हैं जो बार-बार हारनें पर भी फिर उसी जुनून के साथ उठ खड़े होतें हैं जैसे वो कभी हारे ही ना हों|

ऐसे लोग विरले होतें हैं समस्त संसार के प्राणियों से, जो हमारी नज़रों में तो हारते हैं| 

लेकिन उनकी आत्मा सदैव अपराजेय होती है क्योंकि वो सकारात्मकता की असीम ऊर्जा से परिपूर्ण होतें हैं| वो कभी थकते नही, कभी झुकतें नहीं और ऐसे ही लोग कुछ ऐसा कर जातें हैं जो बाक़ी सबसे अलग व अतुलनीय हो| जिनके पीछे अनगिनत लोगों का रेला लग जाता है अनुयायियों के रूप में| 
   
 इसीलिए अपनें जीवन को खुशियों से भरनें के लिए, अपनें जीवन का वास्तविक आनंद उठानें के लिए आपको भी इस सकारात्मक ऊर्जा से भरे रहना होगा|

एक महत्वपूर्ण बात मैं और बताना चाहूँगा जब कभी आपको अपनें किसी कार्य में असफलता हाँथ लगे तो हिम्मत हार के बैठिये नहीं बल्कि अपनी गलतियों का मूल्यांकन कीजिये और पुनः उसी काम पर लग जाइये एक नयी ऊर्जा के साथ|

अगर आप डटे रहे तो एक दिन अवश्य आप सफलता की नयी बुलंदियों पर होंगें|

कई बार ऐसा भी होता है हम जब एक काम में असफल हो जातें है तो निराश होकर बैठ जातें हैं ऐसे जैसे अब जिंदगी में कुछ नहीं बचा|
बल्कि हमें निराश होकर बैठनें की बजाए हमेशा नए रास्तों की तलाश में जुट जाना चाहिए|

जैसाकि हमारे महापुरुषों नें कहा भी है कि हर समय हमारे सामनें आगे बढनें के लिए दो द्वार होतें हैं एक ठीक हमारे सामनें होता है और एक ठीक पीछे|

जब हम एक दरवाजे से मुकाम पानें पर असफल होतें हैं तो हमे उसी 
दरवाजे के सामनें बैठकर अपनीं असफलता का रोना नहीं रोना चाहिए,
बल्कि हमें तुरंत दूसरे दरवाजे में अपनी राह तलाशनी चाहिए| 
ख़ुशहाल जीवन कैसे जियें

दूसरों की सहायता करें 


हमारी प्राचीन भारतीय परम्परा और महान सांस्कृतिक धरोहर इस बात की साक्षात् गवाह हैं कि इस पुण्य धरती पर जन्म लेनें वाली सभ्यताओं में ये एक बात अन्तर्निहित रही है कि हमारे जीवन का मूल कर्तव्य दूसरों की सेवा करते हुए अपनें जीवन का आनंद लेना ही है|

बशर्ते आप एक बात का अवश्य ख्याल रखें कि आपके कर्तव्य और दूसरें की सहायता करनें में, आपको  किस समय किसे प्राथमिकता देनी है|

कई बार ऐसा भी होता है कि आपके इसी स्वाभाव का कुछ लोग फायदा भी उठा सकतें है|

लेकिन दीन दुखियों एवं गरीबों की सहायता करनें में कोई बुराई नहीं हैं|इसीलिए संस्कृत के शास्त्रों में भी कहा गया है “परोप्कारार्थामिद्म्शरीरम” अर्थात ये शरीर ही परोपकार के लिए है|

आपनें ख़ुद ही ये महसूस किया होगा कि निःस्वार्थ भाव से जब कभी आप किसी की मदद करतें हैं तो आपके अन्दर ख़ुशी के साथ-साथ एक आत्मसंतुष्टि का भाव जागृत होता है जो आपको सुख और शांति दोनों का अनुभव प्रदान करता है|

इसीलिए कभी भी किसी की सहायता करनें में हिचकिचाएं नहीं क्योंकि इससे आपके अन्दर करुणा भाव सदैव जागृत रहेगा और आप दूसरों की दुआओं के भी भागी बनेंगे|

व्यायाम करें 


आज की इस तड़कती भड़कती जिंदगी की वज़ह से इस बिंदु का महत्व और अधिक बढ़ जाता है|

हम व्यस्त हैं क्योंकि हमारे पास हमारे लिए ही समय नहीं है!!

क्या हमे ये जानकर ख़ुद पर हंसी नहीं आनी चाहिए|

मुझे तो बहुत आश्चर्य होता है कि लोग ख़ुद से बहुत प्यार करतें हैं लेकिन उसकी देखभाल करनें की बारी आती है तो हम ख़ुद से ही मुँह फेर लेतें हैं|

हमे इसका एहसास अभी नही हो रहा लेकिन जब कोई गंम्भीर बीमारी हमें घेर लेगी तो इधर-उधर दौड़ते भागते फिरेंगें|

एक उदहारण आपके सामनें ही है पान मसाला का|

भारत में किसी भी पान मसाले के पैकेट पर 85% भाग मुहँ के कैंसर की चेतावनी से भरा रहता है लेकिन उसको खानें वाले धड़ल्ले से पैकेट फाड़ते हैं और दिन भर तम्बाकू ही चबातें रहतें हैं|

आपको भी सबसे पहले इन गंभीर बीमारियों को जन्म देनें वालें उत्पादों से दूर रहना चाहिए|

दूसरा हर रोज़ आलस्य त्यागकर कुछ नहीं तो 15 मिनट तक ही व्यायाम 

ज़रूर करना चाहिए क्योंकि प्रदूषण की समस्या आज कल हर जगह आम

हो गई है| जिसकी वज़ह से हमारे स्वास्थ्य पर कई गंभीर बीमारियों का

ख़तरा मंडरा रहा हैं|
ख़ुशहाल जीवन कैसे जियें

किसी से भी ईर्ष्या करनें से बचें 


आपनें बहुत सारे लेख पढ़ें होंगे लेकिन ये बिंदु शायद ही आपको कहीं मिला हो|

शायद आप भी ये सोंच रहें हों कि ये ज़्यादा ज़रूरी नहीं था| लेकिन हमारे हिसाब से यही बिंदु सबसे अधिक ज़रूरी है आज के लोगों की मानसिकता को देखते हुए|

क्योंकि आज कल लोग अपनी परेशानियों से इतना दुखी नहीं होतें हैं जितना दूसरों की ख़ुशी से दुखी होतें हैं|

और हमारे समाज में ये एक गंभीर मानसिक बीमारी का रूप लेता जा रहा है और तो और इस ओर किसी का ध्यान भी नही जाता|

इसका सबसे बड़ा कारण है दूसरों से ईर्ष्या रखना| कई बार तो ऐसा देखनें में आया है बहुत सारे लोग अपनी इस बुरी आदत को जान भी नहीं पाते जब तक कि उन्हें बताया ना जाये|

एक आदत तो और भी आम हो गयी है लोग जाननें के बाद भी अपनी इस आदत की बुराई को या तो स्वीकार नहीं करते या जान-बूझकर अपनी इस आदत में सुधार नहीं करते| जिसका परिणाम उन्हें बाद में भुगतना पड़ जाता है|

तो मेरी आप सभी से यही गुज़ारिश है कि ऐसी आदत से हमें बचना चाहिए

नहीं तो ना तो हम ख़ुश रह पाएंगे ना दूसरों की खुशियों में शरीक हो पाएंगे|

प्रकृति का आनंद लें 


इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में थकना मना है इसका ये बिलकुल मतलब नहीं कि आप पूरी तरह से मशीनों पर ही निर्भर हो जाएँ|

हर कोई आज कल अपनें काम में व्यस्त हैं|

आज के 10-12 साल पहले तक पश्चिमीकरण की शुरुआत भले ही मंद गति से हो रही थी लेकिन उस समय प्रकृति के तत्त्व तब भी विद्यमान थे हमारी दिनचर्या में|

आज कल प्रकृति रुपी तत्त्व का अस्तित्व भारत के गांवों में भले ही शेष रह गया हो लेकिन शहर में बस दिखावा मात्र है|

आज कल शायद ही किसी की सुबह चिड़ियों के चह्चहानें से होती हो, शायद ही कोई बारिश के बाद स्वच्छ हुए हरियाली बिखेरते पत्तों को निहारता हो, शायद ही कोई जल की कल-कल सुनता हो|

आज-कल की आधुनिकता में इन सब का कहाँ लोप हो गया शायद इसका अंदाज़ा लगाना कठिन है|

इसीलिए अगर आप अपनें जीवन की वास्तविक महक लेना चाहतें हैं तो अपनें आप को प्रकृति से जोड़ें|

उसके विभिन्न रूपों का दर्शन करें, प्रकृति की मनमोहक छटा का अवलोकन करें आपको अवश्य असीम आनंद की प्राप्ति होगी|
  
इसीलिए कहा भी गया है कि प्रकृति इस संसार के कण-कण में व्याप्त है बस हम ही अपनीं आँखों पर पर्दा डाले बैठें हैं|

ये करनें का सबसे आसान तरीका यही है सबसे पहले अपनी पसंदीदा

जगहों की एक सूची बनायें और जब भी मौका मिले, उस मौके का फ़ायदा 

उठाकर नयी नयी जगहों पर घूमनें अवश्य जाएँ|

अपनें मित्रों व परिवार वालों के साथ समय बिताएं 


कई बार हम भूल जातें हैं कि जो दिन-रात हम मेहनत कर रहें हैं वो किसके लिए कर रहें हैं?

हमें ये ज़रूर सोंचना चाहिए कि धन-दौलत कमानें के साथ-साथ कहीं ऐसा तो नहीं हम अपनीं जिंदगी के हसीन पलों को दरकिनार कर रहें हों?

कई बार ऐसा होता है हम रोज़ वही काम करतें-करते थक जातें हैं या अपनें काम से ऊब जातें हैं| कई बार तो सबके साथ होते हुए भी हम अपनें आपको अकेला महसूस करनें लगतें हैं|

अमूमन इसका एक कारण ज़्यादा सामनें आया है वो है अपनें मित्रों या परिवार वालों के साथ अच्छा समय ना बिताना|

असल में होता ये है जब हम अपनें किसी चाहनें वाले के साथ या परिवार वालों के साथ अच्छा खासा समय बितातें हैं तो उस समय हम अपनें काम से दूर होतें हैं हमारा दिमाग आराम कर रहा होता है|

और अगर समय बितानें के साथ-साथ कुछ हंसी ठिठोली हो जाये तो फिर क्या कहनें!!

हमारा दिमाग एकदम तरोताज़ा हो जाता है और हम अपनें अन्दर एक नयी ऊर्जा महसूस करतें हैं| 

जिससे जब हम दोबारा काम करनें बैठते हैं तो उस काम में मन लगता है तो हम अन्दर से भी सकारात्मक महसूस करतें हैं|

आशा है अब आपको मित्रों और परिवार वालों के साथ समय गुज़ारनें की अहमियत पता चल गयी होगी|

तो बिना किसी चिंता के साथ अपनें मित्रों से मिलें, खूब सारी बातें करें और उनके साथ हँसना बिलकुल न भूलें|

एक बात और बहुत ज़रूरी है कि उनसे हमेशा दूरी बना के रखें जो आपमें नकारात्मकता भरतें हैं या जिनका एक ही काम होता है दूसरों की बुराई करना|

जो आपसे ईर्ष्या रखतें हैं वो आपका कभी भी भला नहीं कर सकते, उनसे

दूरी बनाना आपका परम कर्त्तव्य है!!

निष्कर्ष

अहा!

ये मैं नहीं आपका दिमाग बोल रहा होगा “निष्कर्ष” देख के!!

मुझे पता है ये लेख पढनें के दौरान आपनें जम्हाई का विश्व रिकॉर्ड तो बना ही डाला होगा!!

लेकिन इतना सब पढनें के बाद आप ये तो समझ ही गये होंगें कि इस लेख के माध्यम से मैनें कोई नया ज्ञान नहीं दिया है|

ये सारी बातें हम में से ज़्यादातर लोगों को पता होती हैं लेकिन इस लेख को लिखनें के पीछे मेरी एक ही मंशा थी आपको अपनें जीवन का मूल्य याद दिलानें की, जिसे अब आप बखूबी समझ गये होंगे|

आशा है ये लेख पढनें के बाद अब आपके मन में “एक ख़ुशहाल जीवन कैसे जियें?” ऐसा प्रश्न दोबारा नहीं उभरेगा|

अब आप सारी बातें भूल ना जाएँ इसलिए जीवन जीनें के अद्भुत तरीकों को हम फिर से संक्षिप्त रूप में दोहरा लेतें हैं जिससे ये आपकी स्मृति में सदा बनें रहे-
  • ·         ख़ुद को पहचानें
  • ·         वर्तमान को जी भर जियें
  • ·         चिंता करनें से बचें
  • ·         हर हाल में ख़ुश रहें
  • ·         सकारात्मकता से परिपूर्ण रहें
  • ·         दूसरों की सहायता करें
  • ·         व्यायाम करें
  • ·         किसी से भी ईर्ष्या करनें से बचें
  • ·         प्रकृति का आनंद लें
  • ·         अपनें मित्रों व परिवार वालों के साथ समय बिताएं


मैं अक्सर आपसे अपनें अनुभवों को ही साझा करता रहता हूँ जैसे मैनें अपनें पिछले लेखों “ख़ुशी का एक कारण” और “एक ख़ुशहाल जीवन के 5 रहस्य” में भी ये दर्शाया है| अगर आपनें वो लेख अभी तक नहीं पढ़ें हैं तो मेरा यही सुझाव है कि आपको वो लेख ज़रूर पढनें चाहिए|

इस लेख का सबसे मत्वपूर्ण बिंदु है “दूसरों की सहायता करें” ये लेख लिखनें में इस बिंदु की महत्त्वपूर्ण भूमिका है| 

अगर इस लेख से किसी एक व्यक्ति को भी अपनें जीवन की सही राह मिलती है या उसको अपनें किन्ही सवालों का हल मिलता है या उसे इस लेख को पढनें के बाद संतुष्टि मिलती है तो मेरी मेहनत सार्थक है|

अगर आपको भी लगता है कि आप किसी की चिंताओं को दूर करना चाहतें हैं, या इस लेख से कोई कुछ समझ सकता है तो आप भी ये कार्य शुरू कर सकतें हैं उसके साथ इस लेख को साझा कर के|

ये भी हो सकता है कि कोई ज़रूरी बात मुझसे छूट गयी हो तो आप कमेंट कर के मुझे बता सकतें है इसके लिए मैं तहे दिल से आपका स्वागत करता हूँ!!

आशा है आप मुझे ये ज़रूर बताएँगे कि आपको मेरा ये लेख कैसा लगा ??

बाक़ी हँसते रहिये, मुस्कुराते रहिये और जीवन के हर लम्हे का आनंद

उठाते रहिये!! 

Hey there, I'm Mayank Bajpai!

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